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कब्ज़ के कारण और आसान घरेलू उपचार जो आपको राहत देंगे

  • Jul 20, 2025
  • 3 min read

Updated: Dec 9, 2025


यदि आप लंबे समय से कब्ज़ से परेशान हैं या पाचन को लेकर चिंता महसूस करते हैं, तो यह लेख आपको कारण समझने और प्राकृतिक समाधान अपनाने में मदद करेगा।


आज के समय में कब्ज़ एक ऐसी समस्या बन गई है जो बहुत आम है, लेकिन इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हमारी बदलती जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें, मानसिक तनाव और शरीर की निष्क्रियता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। भारत में अनुमान के मुताबिक, करीब 22% लोग किसी न किसी रूप में कब्ज़ से पीड़ित हैं। खासकर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। शहरी इलाकों में, जहां सेडेंट्री लाइफस्टाइल यानी बैठे रहने की दिनचर्या आम है, यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।


कब्ज़ को कैसे पहचानें?


यदि निम्न लक्षण नियमित रूप से महसूस हों, तो यह कब्ज़ का संकेत हो सकता है -


  • मल त्याग करते समय अत्यधिक जोर लगाना

  • कठोर या सूखा मल निकलना

  • अधूरा मलत्याग महसूस होना

  • पेट में भारीपन, गैस, बेचैनी


पुराना कब्ज़ हो जाने पर संभावित जटिलताएं:


यदि कब्ज़ को लंबे समय तक अनदेखा किया जाए, तो यह कई अन्य शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है।


  • बवासीर (Piles)

  • एनल फिशर ( गुदा में दरार )

  • फीशूला ( Fistula )

  • हेमोरॉइडल ब्लीडिंग ( रक्तस्राव )

  • स्किन प्रॉब्लम्स, जैसे कि एक्ने

  • मेंटल स्ट्रेस, चिंता और चिड़चिड़ापन

  • कोलन संबंधित रोगों की आशंका


कब्ज़ के प्रमुख कारण


कब्ज़ के कई कारण हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:


  • कम पानी पीना

  • फाइबर की कमी वाला आहार

  • जंक फूड, ज़्यादा तला-भुना भोजन

  • लंबे समय तक बैठना / शारीरिक निष्क्रियता

  • समय पर शौच न जाना / मल को रोकना

  • अनियमित दिनचर्या और देर रात जागना

  • तनाव, चिंता, क्रोध

  • कुछ दवाइयाँ (जैसे आयरन, कैल्शियम सप्लीमेंट)


जीवनशैली में आवश्यक सुधार


क़ब्ज़ में राहत पाने के लिए सबसे पहले जीवन शैली में सुधार की आवश्यकता है क्योंकि समस्या उत्पन्न ही वहीं से हुई है।


  • रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालिये

  • सुबह उठकर पानी पीने की आदत डालें

  • नियमित योग अभ्यास करें

  • दिन में 20–25 मिनट वॉक करें

  • रात का खाना कम करें अथवा बंद कर दें

  • ज़्यादा पानी वाली फल-सब्ज़ियाँ खाएं

  • पेट को कभी ठूस-ठूसकर न भरें

  • सादा, हल्का, जल्दी पचने वाला भोजन करें

  • भोजन का समय नियमित रखें

  • मलत्याग के समय में नियमितता रखें

  • सप्ताह में एक दिन व्रत या फलाहार अपनाएँ

  • प्रतिदिन 2–3 लीटर पानी पीयें

  • भोजन के बीच में पानी न पीयें

  • खाने के १/२ घंटे पहले और आधे घंटे बाद ही पानी पियें

  • मानसिक शांति बनाए रखें – ध्यान या सत्संग के माध्यम से

  • मोबाइल का प्रयोग कम करें, विशेषकर सुबह उठते ही


क्या खाएं और क्या न खाएं?


खाने योग्य खाद्य पदार्थ


सब्ज़ियाँ ( उबली या कम तेल में बनी हुई ) - पालक, लौकी, तोरी, परवल, भिंडी, गाजर, कद्दू, शलजम, ब्रोकली आदि ज़्यादा पानी वाली सब्ज़ियाँ


फल ( छिलके सहित, पके हुए ) - सेब, पपीता, कीवी, नाशपाती, अंगूर, अमरूद ( पका हुआ ), अंजीर, मुनक्का (भिगोया), केला ( कच्चा/पका )


अनाज ( फाइबर युक्त ) - दलिया, चावल अथवा ब्राउन राइस ( बहुत ज़्यादा नहीं फाइबर नहीं है इसमें ), बाजरा ( गर्मी में ज़्यादा नहीं ), जौ, रागी, चोकरयुक्त आटा


अन्य खाद्य पदार्थ - अंकुरित चने या मूंग, छाछ, दही (दिन में), नारियल पानी, नींबू पानी, अलसी के बीज, मेथी दाना, आंवले का मुरब्ब, भीगी हुई किशमिश व मुनक्का ( विशेषकर सुबह )


न खाने योग्य खाद्य पदार्थ


न खाएं - आलू, बैंगन, फूलगोभी, शिमला मिर्च, मटर, तला हुआ आलू, तीखी मिर्च


न खाएं - कच्चा केला, चीकू, शरीफा, खट्टा अमरूद, अत्यधिक मीठे फल


न खाएं - मैदा, ब्रेड, सूजी, बिना चोकर का आटा


न खाएं - चाय-कॉफी की अधिकता, चॉकलेट, बासी भोजन, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब, धूम्रपान


👉 विशेष सलाह:

पेट कभी भी ठूस-ठूस कर न भरें। भोजन सादा, शुद्ध और मात्रानुकूल हो। यहाँ कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में लिखा गया है। बस इस बात का ध्यान रखें - खाना हमेशा अपनी भूख के हिसाब से खाएं और सुपाच्य खायें।


यौगिक समाधान ( आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार एवं ध्यान )


आसन - उत्तानपादासन, मालासन, वज्रासन, मंडूकासन, शशांकासन, वक्रासन, बद्ध कोणासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मर्कटासन, हलासन


प्राणायाम - भस्त्रिका, कपाल भाँति एवं भ्रामरी ( स्ट्रेस कम करने के लिए )


प्रत्याहार - स्वयं पर नियंत्रण के लिए


ध्यान - कम से कम १० मिनट प्रतिदिन


एक आवश्यक बात -


कब्ज़ कोई साधारण असुविधा नहीं है, बल्कि यह शरीर की कार्यप्रणाली में असंतुलन का स्पष्ट संकेत है। यह केवल पेट से नहीं, जीवनशैली, आहार और मानसिक स्थिति से भी जुड़ा होता है। यदि आप इसे समय रहते पहचानें और उचित आहार-विहार अपनाएँ, तो इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।


स्वस्थ पाचन, सुखी जीवन।

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