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Insights & Readings
Thoughtful articles on Yoga, Meditation, and ancient Indian wisdom, crafted to guide your practice and deepen your understanding.


I Am New to Yoga: Shattering the Myths of Flexibility and Form
Since I embarked on the path of learning and teaching Yoga and Dhyana (Meditation), I have encountered a vast number of people who harbor deep doubts about the subject. It is rare to find individuals who possess a correct understanding of what Yoga truly is. If you read through some of the natural questions and statements I hear regularly, you will understand exactly what I mean: “I need to learn from the very beginning.” “I am doing Yoga for the first time.” “I have never do
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दिवाली 2025: एक नई दृष्टि
आज एक प्रश्न के साथ शुरुआत करते हैं ।
कहीं हम दिवाली मनाना भूल तो नहीं रहे हैं?
अगर दिवाली मनाने के पीछे एक ही उद्देश्य होता यो कहानी भी एक ही होती न।
लेकिन यहाँ हर समाज और व्यक्ति के पास अलग-अलग कारण दिखता है, फिर तो ऐसा संभव है वास्तविक कारण कोई और ही हो।
समाज में जितनी भी लोक कहानियाँ या पौराणिक कहानियाँ होती है उसमें अधिकांश रूपक (metaphor) में होती है।
मिट्टी का दीया बिलकुल भी प्रदुषण नहीं करेगा, प्लास्टिक वाले लाइट के तुलना में तो न के बराबर।
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प्रेम या मोह ?
प्रेम से रहे, प्रेम से रिश्ते निभाये। प्रेम को मोह और मोह को प्रेम समझने की भूल अक्सर होती है। अगर मोह को बन्धन कहा जाये तो प्रेम को आज़ादी कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। प्रेम जहाँ त्याग सिखाता है वहीं मोह आपको सिर्फ स्वयं के बारे में सोचना सिखाता है।
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गुरु का जीवन में महत्व ?
गुरु आप किसी को उसके रंग, रूप, वेश आदि के लिए नहीं बनाते। आप गुरु बनाते हैं क्योंकि किसी व्यक्ति विशेष के गुण, उसके कर्म, उसके आचरण, उसके व्यवहार से आप प्रभावित होते हैं। वैसे ही आचरण, वैसे ही कर्म करना चाहते हैं।
उस व्यक्ति विशेष के जैसा ही आप बनना चाहते हैं। यही है गुरु और शिष्य का सम्बंध। एक गुरु के हर शिष्य में उसका गुण विद्यमान रहता है, या ऐसा कह लो हर शिष्य में उसका गुरु छुपा होता है।
वास्तव में गुणों का हस्तांतरण ही गुरु शिष्य परम्परा है।
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